क्या है शिक्षा के अधिकार के सही मायनें .....?


                                                                                                                       8.sep.2015
बरेली में आज कथित युवा सोच वाले सीएम आ रहे हैं। स्मार्ट सिटी बरेली के चुस्त नगर निगम की सक्रियता इन दिनों चरम पर है, जिसे देख कोफ्त हो रही थी। लेकिन आज मुख्यमंत्री आगमन के चलते शिक्षण संस्थानों को बंद कर देना असंवेदनशीलता की हद है, जिस पर मुझे कड़ी आपत्ति है । सरकारें शिक्षा पर संवेदनशील दिखने की लाख कोशिश करें... लेकिन ये वाहियाद स्तर तक असंवेदनशील हैं। मानसिक रूप से अनपढ़ शिक्षाधिकारी क्यूं इन सामंती आदेशों का विरोध नहीं करते! एक दिन स्कूल की छुट्टी क्यूं हमें आम सी बात लगती है। स्कूल जैसी संस्थाए तो भीषण तबाही भरे दौर में भी चलनी चाहिए। एक राजनेता का आगमन भर क्यूं शिक्षण संस्थानों को सबसे पहले प्रभावित करता है? इसका जवाब सुरक्षा है तो जानना चाहूंगी कि आम दिनों में कितनों स्कूल की सुरक्षा के लिए पुलिस तैनात रह पाती है....
हो सकता है मेरी बात पागलपन लगे, हो सकता है...ये अवकाश किसी परिवार को एक दिन का सुकून दे जाए...या छात्र और शिक्षकों की थकावट मिटानें के काम आ जाए... लेकिन ऐसे हर एक दिन मुझे और दूसरों तमाम लोगों के जहन में गुस्सा पैदा करते हैं। असली समाजवादी लोकतंत्र के लिए विशिष्ठ दिखने की इच्छा और विशिष्ठों का ऐसा भौकाल विनाशकारी है।
कभी सोचा है ...कि भूंकप..बाढ़..या किसी मानवीय आपदा के बाद राहत के नाम पर हमें सिर्फ भोजन और स्वास्थ्य सेवाए ही क्यूं दी जाती हैं। क्यूं बच्चो के स्कूल शिविरों में शुरू होने की बाते कम ही सुनाई देती हैं...। असल में न हम कभी शिक्षा का सही मतलब समझ पाए और न ही शिक्षा के अधिकार की सही परिभाषाए।

 

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