संदेश

#loneliness #love #betrayal #singlehood लेबल वाली पोस्ट दिखाई जा रही हैं

नाकाबंदी

चित्र
बंद जिंदगी के दरबाजे से बाहर झांकने की कोशिश करता हूं तो जिंदगी किसी नाकाबंद इलाके में सुनसान पड़े मोहल्ले सी लगती है जो किसी दंगे के डर से सहमा पड़ा है।। नजर कभी गर दूर तक देख पाए तो नजर आता हैण्ण् बीचोंबीच गली में खेलता एक बेधड़क बच्चा जो अब अपनी बैठक की खिड़की के छेद से बाहर पसरे सन्नाटे को उम्मीद भरी आंखों से ताकता रहता है। जिसे इंतजार है अपनी बेधड़कए बेपरवाह शैतानियों के नए दौर का।। ऐसे ही किसी सन्नाटे का शिकार मैं नाकाबंदी लगाए बैठा हूं अपनी जिंदगी के इस मोहल्ले में अब कैद कर चुका हूँ खुद को नाउम्मीदी के किसी जहन्नुम में। जहां उस कैद बच्चे सा तो दिखता हूँ मैंण्ण्ण् मगर किसी नए दौर के शुरू होने की सारी ख्वाहिशें अब दफन हो चुकी हैं। अपनों से अलग.थलग इस नकली दुनिया और बेतहाशा काम में खुद को उलझाया मैंण्ण्ण्ण् जब लौट आता हूँ इस सूनसान कमरे मेंए रख लेता हूँ सिर कभी खालीपन की गोद मेंए तो बहुत सी यादें लोरियां सुनाने चली आतीं हैं मगर यहां कोई लोरी अब नींद नहीं लाती।। जाने कैसा हो गया हूँ मैं चाय.पकौड़ों सी कड़क.चटपटी जिंदगी किसी होटल वाली मैदा की रोटी म...