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दोस्ती को दोस्ती रहने दो ...

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मार्केट और मीडिया में दिवसों को इतना बेचा जाता है कि फ्रेंडशिप डे या किसी और डे पर एक-दूसरे को विश करना अब हास्यास्पद लगता है। इसलिए मैंने किसी को विश नहीं किया। पर कुछ घंटे पहले छोटी बहन(प्राची) का कॉल आया, बोली- हैप्पी फ्रेंडशिप डे दीदी। मैंने कहा, हां यार आज फ्रेंडशिप डे है। बोली, 'तुमने एक बार कहा था कि रिश्ते खत्म हो जाते हैं और दोस्ती चलती रहती है, इसलिए मैं तुम्हें विश कर रही हूं।' जाहिर है किसी को भी यह सुनना अच्छा लगता, मुझे भी लगा। पर उसकी कॉल के बाद से बहुत कुछ दिम ाग में चल रहा है। बीते एक साल की ही बात करूं तो मैं आज कह सकती हूं कि हर रिश्ते की परिणति खत्म हो जाना है और दोस्ती वाले रिश्ते भी उस तरह ही खोखले होने के बाद खत्म हो रहे हैं। आज मैं गिनूं तो लंबी फेहरिस्त में सिर्फ दो दोस्त हैं जिन्हें मैं सच में दोस्त कह सकती हूं, जो वाकई निस्वार्थ रहे हैं अब तक। पर यह भी सच है कि मुझे नहीं पता कि अगले साल मैं यह कह पाऊंगी या नहीं। ऐसा क्यों है? ... इस पर अलग-अलग मत हो सकते हैं। कोई कह सकता है मेरा ही व्यवहार अच्छा नहीं या कुछ और भी। मैं आज यह इसलिए लिख रही हूं कि मैं ...