मर्दों के घरों की औरतें जब निकलती हैं कौम के लिए ...
औरतें मर्दों के घरों में पैदा होती हैं। वे दुनिया के किसी भी अल्पसंख्यक से ज्यादा बुरी स्थिति में हैं क्योंंकि उनका कोई समुदाय, कोई एक देश नहीं, कोई एक संगठन या कोई नेता नहीं होता। अश्वेत, दलित, मुसलमान, यहूदी और दुनिया की तमाम अल्पसंख्यक कौमें एक साथ रहती हैं इसलिए एकसाथ दिखती हैं। वे बहुत आसानी से संगठित हो सकती हैं, उनके मुद्दे, उनकी परेशानियां लगभग एक हैं। इसलिए इन कौमों को वोटर के रूप में अहमियत मिलती है, उनके नेता भी होते हैं। औरतें तमाम जात - धरम के आदमियों के घरों में पैदा होती हैं। लड़कियों को अलग - अलग सोच, माहौल, पहनावा, परंपरा में पैदा किया जाता है, पोसा जाता है, औरत बनाया जाता है। अल्पसंख्यक कौमों के घरों में वे बहुसंखयक घरों की औरतों से ज्यादा कुचली जाती हैं। इन औरतों को बहुसंख्यक के अल्पसंख्यक पर दवाब को तो सहना ही पड़ता है, साथ ही उसका अपना अल्पसंख्यक पिता या पति भी उन्हें कुचलता है। लड़कियों की सहेलियां भी तो उनकी जात, धर्म या मोहल्ले की ही होती हैं। शादी के बाद सहेलियां छूटती हैं और पति के दोस्त / रिश्तेदारों की औरतें सहेलियां बन जाती हैं। आम औरते...