यह मुर्दा शांति खत्म होनी चाहिए...
अजीब मुर्दा शहर है यह... छोटे शहरों से आए लोग ही यहां की पॉश कॉलोनियों में बसते हैं और अपनी असलियत भूलकर बड़े शहरी हो जाते हैं। आज गली में कंडों का धुआं जल रहा था, कई लोग इकट्ठे दिखे, अखबार उठाने बाहर निकली तो सुनसान रहने वाली गली में इतने लोगों को देखकर खटका हुआ, आगे जाकर देखा तो पता लगा कोई सुहागिन सिधार गई। सुहागिन .... क्योंंकि अंतिम यात्रा के लिए उन्हें अंतिम बार उसी तरह सजाया जा रहा था, लाल चुनरी में। कुछ देर वो रुदन देखकर लौटी तो फिर से तेज- तेज बज रहे गाने कान में पड़ने लगे। सामने के मकान में खड़ी एक महिला को पूछा कि क्या आपके यहां music बज रहा है ? उनके मुंह से 'नहीं ' और मेरे मुंह से ' इस वक़्त न बजाएं तो अच्छा है.. ' एकसाथ निकला। उन्हें बताया कि दो घर आगे किसी की मौत हो गई है, उनके मुंह से ' ओह ' निकला और उन्होंने उंगली से इशारा किया । ... उनकी उंगली का इशारा मेरी ही बिल्डिंग के मेरे ही रूम से निचली मंजिल वाले कमरे की ओर था ! वहां रह रहे लोग बाहर नहीं निकले होंगे, इसलिए शायद उन्हें इस घटना का आभास नहीं... । गाने अब भी बज रहे हैं, रुदन खत्म हो चुका ह...