खबर की हत्या ...

पिछले दिनाें दंगल देखी .... एक पिता अपने सपने काे पूरा करने के लिए बेटी काे राेज सुबह पांच बजे से दाैड़ाना शुरू करता है. अपने चचेरे भाई काे हराने, लड़काे काे दंगल में पटखनी देने से लेकर दिल्ली में कॉमन वेल्थ में मेडल जीतकर लड़की पिता का नाम ऊंचा करती है. पूरी िफल्म में तमाम ऐसे सीन आए जब लगा पिता बेटियाें के सिर पर हाथ रखने के साथ उन्हें गले से भी लगा लेगा ... पर पूरी फिल्म भारतीय घराें में पिता आैर बेटी के बीच रहनी वाली एक अजीब तरह की दीवार काे बनाए रखती है. हालांकि आखिरी सीन में मेरी मन की इच्छा पूरी हुई जब आमिर ने फिल्म में अपनी बेटियाें काे शाबाश कहकर गले गलाया ... फिर एक सुखद अंत. दाे दिन पहले बाप और बेटी के बीच की यह अजीब सी दीवार का जिक्र फिर सुना जब शहर की एक सनसनीखेज घटना सामने आई. १५ साल की बेटी ने शिक्षक पिता की रॉड के कई वार करके हत्या कर दी. वजह ... लड़की के मुताबिक 'पापा टॉयलेट जाते समय उसे अजीब तरह से देखते ... गलत जगह छूने की काेशिश करते.' घटना की रात मम्मी की गैरमाैजूदगी में बिस्तर पर पास लिटाकर पिता ने उसे छूना शुरू किया ... विराेध करने पर मारने लगे ताे लड़की ने रॉड से अपने बचाव में उनपर हमला कर दिया. सुबह खुली इस बारदात पर शाम तक चर्चा हाेती रही. एक सीनियर ने समाज में बेटी बाप के बीच और बहन - भाई के बीच जरूरी दूरी की बात याद दिलाते हुए नए जमाने क़े खुलेपन पर सवाल उठाया. सगा बाप बेटी से एेसी हरकत कर ही नहीं सकता से शुरू हुई सारी चर्चाएं कातिल लड़की की रहस्यमयी आंखें और उसकी मां का अपने पति की हत्या पर आपेक्षित वेदना से न राेने के पीछे के कारण खाेजने तक सिमटकर रह गई. रिश्ताें मे अजीब तरह की दूरी की पैराेकारी करने वाले इसकी जरूरत इसलिए मानते है क्याेकि पुरूष का अपनी शारीरिक इच्छाआें पर वश नहीं है.. एेसे में ख्याल ताे दूसरे लिंग काे ही रखना हाेगा. अपचारी लड़की का कहना है कि मां से कई बार शिकायत की पर उन्हाेंने वहम कहकर हर बार टाल दिया. मां नहीं समझी ... या संवेदनशील नहीं हुई... ये सवाल सब उठा रहे हैं... पर पिता के कुकृत्य करने की गुंजाइश पर काेई साेचने काे तैयार नहीं?? लड़की या महिला पर हाेने वाले शरीरिक/मानसिक/याैनिक उत्पीड़न की ९० फीसद शुरूआत घर से हाेती है. पर एेसी घटनाआें पर अव्वल ताे परिवार वाले ही जानकर पर्दा डाल देते हैं ... मीडिया में आती भी है ताे पाठक के नजरिये काे ध्यान में रखकर समाजविराेधी बताकर 'सिंगल कॉलम' में निपटा दी जाती हैं. पत्नी और पूरे परिवार काे हमेशा कैद करके रखने वाले शिक्षक की पत्नी की सामाजिक और आर्थिक हालात काे जानन् के बाद भी उसकी असंवेदनशीलता पर हम सवाल उठा रहे हैं... पर घर में हाेने वाली हिंसा काे सिरे से नकारने की हमारी असंवेदनशीलता पर सवाल काैन उठाएगा?? अखबार भी लिखते समय इस साेच से ग्रसित हैं .... अपचारी और परिवार की पहचान काे दिलखाेलकर उजागर किया गया जबकि लड़की खुद से रेप की काेशिश का आराेप लगा रही है!

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