चुप्पी तोड़ें गांधी वादी ...


आज किताबी हो चुके बापू के जीवनपथ पर हम में से कई बात नहीं करना चाहते ....बापू हिन्दू आतंकवाद पैदा कर रहे लोगों के लिए सिर्फ बँटवारे और भगत सिंह को फांसी पर लटकाने का कारण भर रह गए हैं ......।  बिना उस देश कल वातावरण में पैदा हालातों को ध्यान रख लोग उन्हे नौटंकी करार देते हैं । जिनके पास इन इल्जामों के तथ्यपरक जबाव हो सकते हैं ... उनको कभी बोलते नहीं देखा। शायद ये भी बापू की अहिंसा के पाठ को जीने का तरीका होगा ... लेकिन इस विषय पर ऐसे लोगों को अपना पक्ष ज़रूर रखना चाहिए । चुप्पी कई बार मौन समर्थन बन जाती है ... सालों से बापू को लेकर जो कुछ भी प्रसारित किया जा रहा है , उसमें ये चुप्पी हामी बनती जा रही है ...।  मैं नहीं कहती कि  गांधी वादी विचारक भी दूसरे संगठों के जैसे हो हल्ले में फंस जाए ...लेकिन वे कम से कम लगातार अपनी ज़मीन मजबूत कर रहे भ्रम को तोड़ने की कोशिश तो करें ... युवाओं का पथ विचलन बहुत आसान है ... आज जिस तरह तथाकथित युगपुरुष और फ़ांसीवाद होती राजनीति को लेकर युवा उत्साही दिख रहा है ...ऐसे अपने में खोये आत्म प्रचार के  शिकार युवा का गांधीस्म से साक्षात्कार करना आज देश की ज़रूरत है .....
 

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