बस यूं ही .....

कई लोग हमेशा ज़िंदगी भर एक से ही रहना चाहते है , बिलकुल पहले जैसा .... बिना किसी बदलाव के।
सोचो तो लगता है... जैसे किसी बंद कुएँ में रहने वाले लोग है शायद ये! पर थोड़ा समझने की कोशिश करो तो पता चलता है... कि नहीं, गलती यही है कि हम पूरा वक़्त लोगों को परखने में ही लगा देते है ...। ये वो हैं जो हर दम बदलते लोगों से परेशान हो चुके हैं और खुद को उसी फेहरिस्त में नहीं देखना चाहते।
 बदलना प्रकृति का नियम है ....लेकिन क्या सच में इस नियम से इतनी आसानी से संतुष्ट हुआ जा सकता है । जो भी हमारे बस में हो ... हम हमेशा उसे अपनी मुट्ठी में रखने की कोशिश करते हैं
जो नहीं रख पाते वो प्रोफ़ाइल ...मोबाइल ...स्क्रीन सेवर ....रिंगटोन
जैसी तमाम चीजों को ठीक वैसा रखने की कोशिश कर मन बहला लेते हैं ...। 'शट द पास्ट ... कट द फ्युचर...बी इन प्रिसेंट' सुनना बड़ा आसान है... लेकिन पिछली ज़िंदगी के पलों में जीकर आज गुज़ार रहे लोगों के लिए ये कोई कम बड़ा श्राप नहीं है। पहले जैसा बना रहना असल में कोई कुंठा नहीं , पुरानी ख़ुशबुओं को खुद में समेटे रहने की अजीब सी जुगत  है .... जो पहली और आखिरी नज़र में पागलपन ही करार दी जा सकती है .... । लेकिन फिर वही कहूँगी कि ऐसी विशेष टिप्पणी देने की सनक से निकालना वाकई ज़रूरी है ।


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