"....अब क्या करें कि किताबों में जी नही लगता!"
''इल्म की 'ताक़त" पहचानतें हैं हम,
मगर अब क्या करें कि 'किताबों' में 'जी ' नही लगता!
'नतीजें' बहुत देख लिए कर करके 'बफ़ा' सबसे...,
सनम अब 'तुमसें' 'शुब्हों' का ये बादल नही छटता।।"
'शिवांगी जायसवाल'
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