फैसला



किसी को घर का रास्ता दिखा दिया,
कोई दुख में छोड़ घर चला गया।
कोई बस सप्ताह भर बैठा सोचता रहा,
इस्तीफे में क्या लिखे,
फिर वो इस्तीफा लेकर किधर जाये।
वो इस्तीफे में लिखे
गालियां, लाचारी, बेइज़्ज़ती
या लिखे आठ घंटे की छुट्टी
वो लिखे चाटूकारिता
या लिखे मैं एक स्तंभ।
फिर लिखकर डाक भेजे
या फिर पोस्ट करे आभासी दीवार पर।
डाक दबा दी गयी या पोस्ट शेयर हुई
तो क्या करे..
उसने सोचा ..
सिगरेट पीते पीते ,
और अगले दिन लौट गया दफ्तर।।
- शिवांगी, 5 मार्च 2018 

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