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day one- when the English learning becomes blogging stories

  In my childhood, I was very keen to learn English. My elder sister was intelligent among three of us siblings, so I always looked at her to get help to learn this language. She used to tell my younger brother and me how to pronounce the alphabet. I used to read out English lessons loudly to get out of the hesitation of speaking English. In school days, I was an average student, particularly in English. But it got improved later, as I progressed to the ninth standard, there was an English teacher, Name Ajay Sir. I never got a chance to attend his class because he taught a Higher Class. But Once he came to our Physical education class, It supposed to be a free class those days because no teacher took an interest in that Subject Sadly. So when once he attended that class, we students were asked to read out one-one paragraphs of a lesson. I then wanted to perform well in front of him, and my Hindi speaking practice worked. I still have a fresh memory after 13 years of that incident. ...

#कोरोनाकाल : रिश्ते खून से नहीं प्रेम से बनते हैं, सड़क के बच्चों को हमारा इंतजार ...

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  #जनसंख्यादिवस #कोरोनाकाल : संयुक्त राष्ट्र बता चुका है कि दुनियाभर में कोरोना को लेकर हुई तालाबंदी में महिलाओं के साथ शारीरिक और यौन हिंसा हुई। इस मामले में विशेषज्ञ मानते हैं कि आम स्थितियों में भी तालाबंदी के दौरान अनचाहा गर्भ ठहरने के मामलों की तादाद बढ़ी है। चूंकि अनचाहा गर्भ है तो बहुत संभावना है कि लिंग जांच के लिए दंपति या गर्भवती महिलाएं अवैध रूप से चल रहे सेंटरों पर जाएं। हाल में हुए एक वेबनार में लखनऊ की संस्था वात्सल्य ने बताया कि महामारी शुरू होने के बाद से लिंग जांच और भ्रूण हत्या के मामलों की निगरानी करने वाली जिला जांच कमेटियां ठप चल रही हैं। जबकि संक्रमण काल में ऐसे निगरानी तंत्र को और कड़ा किए जाने की जरूरत है। इससे संकेत मिलता है कि आने वाले समय में भ्रूण हत्या और गर्भवतियों की मौत के मामले बढ़ सकते हैं। याद रहे कि लॉकडाउन के दौरान कॉडम जैसे जरूरी सुरक्षा उपाय मेडिकल पर न होने जैसी खबरें आयी थीं। हालांकि कॉडम का इस्तेमाल करने वाले शादीशुदा पुरुषों का प्रतिशत भारत में बहुत कम है क्योंकि शादी संस्थान में अक्सर महिलाओं को ‘प्रॉपर्टी’ माना जाता है। वहीं, दूसरी ओर ...

#कोरोनाकाल : बिग-बी के हमउम्र प्रशंसकों को मदद देने का वक्त

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अमिताभ बच्चन के कोरोना पॉजिटिव होने की खबर से आप सभी यह तो समझ रहे होंगे कि कितना ज्यादा सतर्क रहने की जरूरत है। कुछ दिन पहले जब महाराष्ट्र सरकार ने शूटिंग की अनुमति दी तो प्रोड्यूसर एसोसिएशन ने अमिताभ बच्चन, बोमन ईरानी और दूसरे 65 से अधिक उम्र के एक्टरों का हवाला देकर कहा कि आवश्यकता के आधार पर इस आयुवर्ग के एक्टरों को शूटिंग की इजाजत मिले। इंडियन एक्सप्रेस की 30 मई की खबर के हिसाब से इस अनुरोध को राज्य सरकार ने मान भी लिया। अब यह तो बॉलीवुड कवर करने वाले रिपोर्टर ही बेहतर जानते होंगे कि अमिताभ बच्चन ने इस दौरान शूटिंग की या दूसरे माध्यम से वे किसी संक्रमित के संपर्क में आए। पर आज की खबर इस आयुवर्ग के लोगों के लिए बचाव के नियमों के सख्ती से पालन की जरूरत को साबित करती है। कहने की जरूरत नहीं है कि हम सभी अपने घर के बुजुर्ग व हृदय और मधुमेह रोगियों को लेकर सबसे ज्यादा सतर्क रहें। खुद सभी बचाव के नियमों का पालन करके उनके सामने नजीर बनें। हम इस वक्त तीन दिन के लॉकडाउन में हैं। देश के अलग-अलग हिस्सों में ऐसे लॉकडाउन लगाए गए हैं, जिनकी वैज्ञानिक प्रमाणिकता पर संदेह होता है मगर इससे कुछ हद त...

छात्र राजनीति में दम दिखाने उतरीं ढाई फुट की सोनाली

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प्रकाशन तिथि : 26 अगस्त, 2019 सोनाली जैसी लड़कियां ही विशेष वर्ग की लड़कियों के लिए प्रेरणा का उदाहरण बनेंगी

#letsclickthelife @sangambank

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#letsclickthelife  #kumbh2019 #sangambank  photographed by shivangi

दिल्ली की काॅपी-पेस्ट पत्रकारिता ...

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एक्जिट पोल के बारे में दो दिन पहले एक विश्लेषणात्मक लेख पढ़ने को मिला। साथी गजेंद्र जी   Gajendra Ricky Singh   ने अपने फेसबुक पर शेयर किया था एक टिप्पणी के साथ - ‘वरिष्ठ पत्रकार योगेश मिश्रा के आईने से एक्जिट पोल।’ पोस्ट पढ़कर उस अनजान पत्रकार के अध्ययन से प्रभावित हुई। कुछ ही देर के बाद वही पोस्ट राज्यसभा टीवी के लिए काम कर चुके पत्रकार दिलीप खान   Dilip Khan   के वाॅ ल पर पढ़ा। पोस्ट पढ़कर शंका हुई तो सवाल जवाब किए। दिलीप खान ने कहा कि उनके पोस्ट इस तरह चोरी होते रहे हैं और अब वह इस पर हैरान नहीं होते।   पत्रकार योगेश मिश्रा ने दिलीप खान के पोस्ट करने के एक घंटे बाद वही पोस्ट किया है इसलिए योगेश मिश्रा पर संदेह किया जा सकता है कि यह उनकी मूल सामग्री नहीं है। योगेश मिश्रा बाकायदा अपने नाम से फेसबुक पेज चलाते हैं, जिसे 6107 लोगों ने लाइक किया है। मतलब उनके पोस्ट इतने यूजर की वाॅल तक पहुंचते हैं। वह Editor in chief   Newstrack.com   & Apna Bharat हैं। उन्होंने पोस्ट पर न अपना नाम लिखा है न दिलीप खान का। इस एक पोस्ट पर उन्हें 208 लाइक, 71 कमेंट और ...

नाकाबंदी

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बंद जिंदगी के दरबाजे से बाहर झांकने की कोशिश करता हूं तो जिंदगी किसी नाकाबंद इलाके में सुनसान पड़े मोहल्ले सी लगती है जो किसी दंगे के डर से सहमा पड़ा है।। नजर कभी गर दूर तक देख पाए तो नजर आता हैण्ण् बीचोंबीच गली में खेलता एक बेधड़क बच्चा जो अब अपनी बैठक की खिड़की के छेद से बाहर पसरे सन्नाटे को उम्मीद भरी आंखों से ताकता रहता है। जिसे इंतजार है अपनी बेधड़कए बेपरवाह शैतानियों के नए दौर का।। ऐसे ही किसी सन्नाटे का शिकार मैं नाकाबंदी लगाए बैठा हूं अपनी जिंदगी के इस मोहल्ले में अब कैद कर चुका हूँ खुद को नाउम्मीदी के किसी जहन्नुम में। जहां उस कैद बच्चे सा तो दिखता हूँ मैंण्ण्ण् मगर किसी नए दौर के शुरू होने की सारी ख्वाहिशें अब दफन हो चुकी हैं। अपनों से अलग.थलग इस नकली दुनिया और बेतहाशा काम में खुद को उलझाया मैंण्ण्ण्ण् जब लौट आता हूँ इस सूनसान कमरे मेंए रख लेता हूँ सिर कभी खालीपन की गोद मेंए तो बहुत सी यादें लोरियां सुनाने चली आतीं हैं मगर यहां कोई लोरी अब नींद नहीं लाती।। जाने कैसा हो गया हूँ मैं चाय.पकौड़ों सी कड़क.चटपटी जिंदगी किसी होटल वाली मैदा की रोटी म...