खिड़की
कितनी जरुरी है
खिड़की तुम्हारे लिए?
जानना हो तो
चांद को न निहारो
जरा टहल आओ नीचे
और देखो ...
खिड़की के बाहर
क्या पड़े हैं सिगरेट के खोखे
जिन्हें आधा पीकर ही,
तुमने छोड़ दिया था
ताकि दिखता रहे उस पर
नाम महंगी कंपनी का।
खिड़की के बाहर
क्या पड़े हैं वो गुब्बारे
जिन्हें देखकर तुम
पुचकारती थीं
अपनी न पैदा हो सकी
औलादों को..।
यह भी देख आओ
क्या वो भाव पड़े हैं ग्लानि के
जो सुबह उठकर
महसूस करती थी तुम
और क्या वो रातें भी
जब फिर बंद कर लेती थीं तुम खिड़की।
- शिवांगी (5 सितंबर 2018)

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