घड़े सी औरत

लड़कियां पीटी जाती हैं
औरत बनने की प्रक्रिया में।
बताया जाता है कि कुम्हार का
कच्चे घड़े को ठोंकना जायज है।
जब बन जाती हैं औरत,
तो पीटी जाती हैं परखने को, 
कि खरीदार ठोंक बजाए तो न फूटें।
फिर घड़े के माफिक आवाज
आदि की जांच कर होता है सौदा।
सौदागर ले जाता है घर
रसोई में दुबका दी जाती हैं।
जरूरत पर लंबी डंडी के वर्तन से
निकाल लिया जाता है पानी।
अब खुद ही रखना होता है
उन्हें अपने टूटने का ख्याल।
उन्हें डरना होता है कि कोई
फिर पीटकर न फोड़ डाले।
अब सौदागर ही होता है उनका कुम्हार।
पर हर बार ठुंककर खुद जुड़ जाती हैं अब वे।।
- शिवांगी, 18. जून. 2018

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