वैश्विक मंजूरी के इंतजार में हैं भारत में बने टीके
हिन्दुस्तान, नई दिल्ली (2 जुलाई, 2021 को प्रकाशित)
शिवांगी |
भारत में अभी कोविशील्ड और कोवैक्सीन ब्रांडों की वैक्सीन से टीकाकरण जारी है। ये दोनों ही वैक्सीन अलग-अलग वैज्ञानिक अध्ययनों में कोरोना व इसके स्वरूपों के खिलाफ सुरक्षा देने में प्रभावी पाई गई हैं। पर अभी विश्व स्वास्थ्य संगठन ने कोवैक्सीन को आपातकालीन उपयोग की सूची में शामिल करने के लिए मंजूर नहीं किया है। दूसरी ओर, अमेरिका व अन्य कई बड़े देशों में भी अभी इस टीके की स्वीकृति लंबित है जबकि कोविशील्ड को वैश्विक निकाय की स्वीकृति मिल चुकी है। चलिए जानते हैं कि भारत में बने दोनों टीकों की वैश्विक स्थिति क्या है और इसका हमारे ऊपर क्या प्रभाव पड़ रहा है।
कोवैक्सीन ::
1. डब्लूएचओ की सूची में जल्द शामिल होगी
भारत बायोटेक के बनाए इस स्वदेशी टीके को जल्द ही विश्व स्वास्थ्य संगठन की आपातकालीन उपयोग की सूची में शामिल किया जा सकता है। इस महीने कोवैक्सीन के तीसरे चरण के परीक्षण का डाटा वैश्विक निकाय के समक्ष पेश किया जाएगा, जिसके बाद स्वीकृति प्रक्रिया पूरी होने की उम्मीद है। गौरतलब है कि डब्लूएचओ ने कहा था कि टीके से जुड़ा जो डाटा उन्हें भेजा गया, वह अपर्याप्त था।
2. अमेरिकी मंजूरी में वक्त लगेगा
अमेरिकी खाद्य एवं दवा नियामक (एफडीए) ने भारत बायोटेक की कोवैक्सीन को आपातकालीन इस्तेमाल की मंज़ूरी नहीं दी। अमेरिकी एफडीए ने पिछले माह अमेरिकी साझेदार ‘ओक्यूजेन इंक को सलाह दी कि वह भारतीय वैक्सीन के इस्तेमाल की मंज़ूरी हासिल करने के लिए अतिरिक्त आंकड़ों के साथ जैविक लाइसेंस आवेदन (बीएलए) पाने के लिए अनुरोध करे। यानी अब इस टीके के उपयोग की स्थायी मंजूरी के लिए आवेदन करना होगा जिसमें थोड़ा और वक्त लग सकता है। इस बारे में भारत ने कहा कि हर देश के नियामक के अपने नियम हैं, हम इसका सम्मान करते हैं।
3. यूरोपीय संघ से तनातनी
यूरोपीय संघ के देशों में यात्रा की अनुमति के लिए गुरुवार से ग्रीन पास देना शुरू हो गया है, अभी इसमें कोवैक्सीन और कोविशील्ड को शामिल नहीं किया है। जिसको लेकर तनातनी की स्थिति बनी है। केंद्र सरकार ने इसको लेकर कहा है कि अगर ऐसा नहीं हुआ तो वह यूरोपीय संघ के सदस्य देशों से आने वालों के लिए 14 दिन का अनिवार्य क्वारंटाइन लागू कर सकता है।
4. अभी 8 देशों से मिली स्वीकृति
स्वदेशी टीका कोवैक्सीन को अभी अभी तक केवल ईरान, फिलीपींस, मॉरीशस, मैक्सिको, नेपाल, गुयाना, पराग्वे और जिम्बाब्वे ने ही मंजूरी दी है।
----------------
कोविशील्ड ::
1. वैश्विक निकाय से मिली मंजूरी
ऑक्सफोर्ड-एस्ट्राजेनेका की बनायी वैक्सीन का भारत में उत्पादन सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया ने किया है, जिसे कोविशील्ड नाम से जाना जाता है। इस वैक्सीन को विश्व स्वास्थ्य संगठन की मंजूरी मिल चुकी है।
2. यूरोपीय संघ की मान्यता नहीं
यूरोपीय औषधी एजेंसी ने कोविशील्ड को आपातकालीन उपयोग के लिए मंजूरी नहीं दी है। इस कारण इस टीके को यूरोपीय संघ ने ग्रीन पास देने वाले टीकों की सूची में भी शामिल नहीं किया है, जिससे अधिकांश यूरोपीय संघ के सदस्य देशों में कोविशील्ड लगवाने वाले भारतीयों को प्रवेश फिलहाल नहीं मिल सकेगा।
3. नौ यूरोपीय देशों ने स्वीकारा
भले यूरोपीय संघ ने कोविशील्ड को स्वीकृति न दी हो पर जर्मनी व स्पेन जैसे मुख्य यूरोपीय संघ के सदस्य देशों में इस टीके को मान्यता दी गई है। इसके अलावा, सात अन्य यूरोपीय देश ऑस्ट्रिया, एस्टोनिया, ग्रीस, आयरलैंड, स्लोवेनिया, आइसलैंड और स्विट्जरलैंड ने भी इसका मान्यता दी है।
एक नजर में
70 से 90 प्रतिशत तक प्रभावशील है कोविशील्ड, दूसरी खुराक लेने के बाद।
78 से 95 फीसदी तक प्रभावी है कोवैक्सीन, दूसरी डोज के बाद।
01 भारत में बनी वैक्सीन ‘कोविशील्ड’ को ही डब्लूएचओ ने अभी मंजूरी दी है
टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें